सर्वायकल या गर्दन का दर्द को ठीक
कैसे करें?
Neck Pain in Hindi
आज के इस भागदौड़ भरे युग में सर्वायकल स्पान्डयलोसिस
के मरीजों मे बहुत बड़ा इजाफा देखा गया हैं।
पुराने समय में अस्पताल की लाइन में जहाँ एक या दो मरीजही मुश्किल से इस रोग से
ग्रस्त पाए जाते थे वहीं अब काफ़ी बडी संख्या में बहुत से मरीजनजर आते है। आयु से भी अब इसका कोई लेना-देना न रहा। 15 वर्ष की आयु से शुरू
होकर बढती हुयी उभ्र के लोगों मे यह समस्या सभी में आम रूप से देखी जा सकती है।
लक्षण और कारण
इस रोग के लक्षण में कोई जरूरी नहीं हैं कि सिर्फ़ गर्दन(Neck) में पीड़ा होने पर और
गर्दन(Neck) के जकड़े होने पर ही आयें। विभिन्न सर्वायकल मरीजों मे अलग -2 तरह के लक्षण देखे जाते हैं:
गर्दन(Neck) की पीड़ा और जकडन, गर्दन(Neck) स्थिर रहना, बहुत कम या न घूमना।
चक्कर आना, कन्धे का पीड़ा , कन्धे की जकडन और बाँह की नस का पीड़ा
।
ऊगलियों और
हथेलियों का सुन्नपन
गर्दन(Neck) की पीड़ा के मुख्य कारण:
अगर आपकी दिनचर्या अनियमित और अनियंत्रित हैं तो आप गर्दन की पीड़ा से ग्रस्त हो सकते हैं ।
टेढ़ी मेढ़ी अवस्था में लेटकर सोना, हमेशा उबड़-खाबड़ बिस्तर पर
सोना, आरामदेह
गद्देदार सोफ़ों पर या कुर्सी पर देर तक बैठे
रहना, सोते
समय ऊँचा तकिया रखना या लेट कर टी वी देखना ।
यदि आप गलत ढंग से वाहन को चलाते हैं|
बहुत झुक कर बैठना या बैठे-बैठे पढना या लेटकर पढना।
काफी देर तक जमीन पर बैठकर सिलाई, बुनाई, व कशीदा करने वाले लोगों
में।
गलत ढंग से और शारीरिक शक्ति से ज्यादा बोझा उठाने
से |
कसरत न करना और हमेशा चिंता में रहते हुए जीवन को जीना।
संतुलित भोजन ग्रहण न करना, भोजन मे ‘विटामिन डी’ की कमी का
होना, अधिक
मात्रा मे चीनी और अधिक मात्रा में मीठाईयाँ खाना।
अगर व्यक्ति को गठिया आदि का रोग हो|
घंटों कम्पयूटर के सामने बैठकर काम करना|
रोग निवारण के
लिये प्रचलित उपचार तरीके:
पीठ की पीड़ा के लिये भी यही सावधानियाँ काम आयेगीं। इसलिये
निम्म बातों का ध्यान रखें और अपना जीवन सुचारु रुप से जियें:
जब भी आप किसी कुर्सी या सोफ़े पर बैठें तो अपनी पीठ
को सीधा रखने का प्रयास करें तथा घुटने नितम्बों से ऊँचे उठाकर रखें।
चलते समय शरीर को सीधी अवस्था मे रखने का प्रयास
करें।
जब भी गाडी चलाये अपनी पीठ को सीधी रखें।
कोमल, फ़ोम के बिस्तर पर लेटना छोडकर लकड़ी के बने तख्त का
प्रयोग करें ।
घर का काम करते समय पीठ को सीधी रखें।
अगर पीड़ा अधिक हैं तो गर्म पानी मे थोडा सा नमक डाल
कर सिकाई करें। यह क्रम दिन मे कम से कम 2-4 बार तक अवश्य करें। दर्द में जल्द
आराम देने मे यह बहुत लाभदायक है।
तकिये (pillow) की बनावट
तकिये को लेकर लोगों मे अलग-अलग तरह की ग़लतफ़हमियाँ हैं।
सर्वायकल स्प्पान्डयलोसिस से पीडित व्यक्ति या तो तकिया लगाना ही बन्द कर देता है
या फ़िर अन्य सहारे का प्रयोग करने लगता है जैसे तौलिये को मोड कर सिर के नीचे
रखना। लेकिन यह सब प्रयोग अन्तः उसके लिये नुकसान ही पैदा करते हैं। सर्वायकल
स्प्पान्डयलोसिस के हर मरीज मे कौलर और ट्रेक्शन की आवशयकता नही पडती , लेकिन आजकल इसका प्रयोग
कई जगह बेवजह भी होता रहता है। लेकिन मरीजके रोग की वजह के अनुसार इसका महत्व भी अधिक
है।
सर्दियों के मौसम में सर्वायकल स्प्पान्डयलोसिस के मरीजों
की समस्यायें बढनी शुरु हो जाती हैं,
बाजार मे मिलने
वाले कालर के अपेक्षा आम प्रयोग में होने वाले गर्म मफ़लर को गले मे इस तरह बाधें
कि गर्दन(Neck) का घुमाव नीचे की तरफ़ अधिक
न हो। देखने मे भी यह अजीब नहीं लगता और गर्दन(Neck) की माँसपेशियों को ठंड
से भी पूरी तरह बचाव हो जाता हैं।
एकयूप्रेशर (Acupressure) विधि से
बहुत से डॉक्टर संभवत: एकयूप्रेशर की उपयोगिता से
सहमत नहीं हैं, मगर सर्वायकल स्प्पान्डयलोसिस के कई मरीजों मे इस पद्दति से आराम मिला हैं , भले ही यह इस दर्द के कारणों
को दूर करने मे सक्षम न हो लेकिन पीड़ा के अधिक बढ़ने पर यह आपको काफ़ी जल्द ही आराम
दे देती है।
सर्वायकल स्प्पान्डयलोसिस मे फ़िजयोथिरेपी की भूमिका:
सर्वायकल व्यायाम पीड़ा को बढ़ने से रोकते हैं साथ मे
अकडे हुये जोडों और माँसपेशियों को भी सही करते हैं ।
अपने सिर को दाहिनी तरफ़ कन्धे तक झुका ले , थोड़ी देर रूकें और उसके बाद पुन: सीधी कर ले। यही
क्रम फिर बायें तरफ़ भी करें।
अपनी ठुड्डी (chin) को छाती की तरफ़ झुकायें, रुकें,तत्पश्चात सिर को पीछे की
ओर ले जायें।
अपने सिर को बायें ओर के कान की तरफ़ मोडें, रुकें और तत्पश्चात मध्य
मे लायें। यही क्रम बायें तरफ़ भी धीरे-धीरे करें।
इस व्यायाम को करते समय साँस को रोके नहीं। हर व्यायाम को पांच से छ: बार तक करें और इसके
बाद शरीर को बिलकुल ढीला छोड दें।
अपने माथे को हथेलियों से दबाये और सिर को अपनी जगह
से जरा भी हिलने न दें।
अपनी हथेलियों का दबाब सिर के बायें तरफ़ दे और सिर
को हिलने न दें। यही क्रम दायें तरफ़ भी करें।
अपनी दोनों हथेलियों का दबाब सिर के पीछे की ओर दें और सिर को बिलकुल स्थिर रखें।
अपनी हथेलियों का दबाब माथे पर दें और सिर को बिलकुल
स्थिर रखें।
फ़िजयोथिरेपी व्यायामों को करते समय यह बात हमेशा
ध्यान रहें कि अगर किसी भी समय ऐसा लगे कि पीड़ा अधिक हो रही हैं तो व्यायाम न करें। सर्वायकल व्यायामों को कम से कम दिन मे
दो से तीन बार जरूर करें ।
एक समतल फ़र्श पर बिना तकिये के पीठ के बल आराम से लेट
जाएँ| फिर अपनी गर्दन(Neck) को जितना संभव हो उतना
धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाते जाएँ| यह ध्यान रहे कि पीठ का हिस्सा बिलकुल न उठे| गहरी से गहरी सांस भीतर की ओर खींचें|
फिर उतने ही धीरे-धीरे गर्दन(Neck) नीचे की ओर करते जाएँ|
सांस धीरे-धीरे छोड़ें और पूरी शक्ति से अंदर फेफड़े की हवा बाहर फेंक दे | यह व्यायाम
कम से कम दस से बारह बार, सुबह-शाम करें| इस व्यायाम से आपके गर्दन(Neck) की मांसपेशियों को ताकत मिलती है तथा इसके परिणाम आपको
पंद्रह दिन के भीतर मिलने लगेंगे| नियमित व्यायाम से गर्दन(Neck) की पीड़ा से पीछा छुट सकता
है.
होम्योपैथी चिकित्सा
(Homeopathic Treatment)
जहाँ अन्य चिकित्सा की पद्धतियाँ विशेष कर एलोपैथी
चिकित्सा पद्धति सिर्फ़ पीड़ानाशक औषधियों तक ही सीमित हैं वहीं होम्योपैथी रोग के मूलकारण और उससे उत्पन्न होनी वाली
समस्यायों को दूर करने मे कारगर है। एक होम्योपैथिक चिकित्सक को सर्वायकल रोगों मे
न सिर्फ़ औषधि के चयन बल्कि रोग को करने के तरीको के बारे मे भी अच्छी तरह जानना चाहिये।
अधिक समस्यां होने पर
योग्य डॉक्टर से सलाह ले|