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19 नवंबर 2015

टॉन्सिल्स के घरेलू उपचार Gharelu upchar for Tonsils in Hindi

जानिये  क्या है Tonsil ?


Tonsil
Tonsil
Tonsils की सूजन गले में होनेवाला मुख्य  बीमारी है. जिन लोगों को यह बीमारी होता है, उन्हें यह बार-बार सताता भी है. कफ एवं रक्त में खराबी के वजह से  तालू की जड़, जिसे गलतुंडिकाभी कहते हैं, उसमें ज्यादा सूजन आ जाती है. इसका मुख्य वजह से  सर्दी लगना है. सर्दी के वजह से  गला अधिक प्रभावित होता है. यह आपके शरीर में होनेवाले उपद्रव उपसर्गो से हमारी रक्षा करता है. 
     
क्यों होता है Tonsil सूजन

शीत ऋतु में आहार-विहार में गड़बड़ी के वजह से  ठंड लग जाती है जिसके वजह से  सूजन हो जाता है. इसके साथ-साथ अम्लीय पदार्थो का अधिक प्रयोग करना, ज्यादा दूषित वातावरण में रहना,  संक्रमित दूध पी लेना ,  बुखार  आदि वजह से  हैं, जो इस बीमारी को बढ़ाते हैं. Tonsil होने पर कंठ अधिक लाल हो जाता है व खाने एवं थूक निगलने में ज्यादा दर्द होता है.

Tonsils  के लक्षण

सबसे पहले Tonsil सूज कर ईंट के समान लाल हो जाता है. Tonsil पर पीला एवं सफेद चिह्न् पड़ जाता है. बीमारी अधिक बढ़ जाने पर प्रदाहवाला लाल भाग पक जाता है, उसमें पस भी हो सकता है. बच्चों में यह बीमारी अधिक होता है एवं शरीर का ताप 104 डिग्री तक चला जाता है. गले में पीड़ा के साथ-साथ ज्वर के वजह से  सिर में तेज दर्द, आवाज का बैठ जाना, खांसी एवं बेचैनी बढ़ जाती है. उचित चिकित्सा के अभाव में बीमारी बढ़ कर कठिन हो जाती है. सांसों से बदबू आती है.

क्या है इसकी चिकित्सा

आयुर्वेद चिकित्सा सबसे पहले रोग होने वाले कारणों से दूर रहने को ही कहता है. वैसे सभी खान-पान से बचें, जो बीमारी को बढ़ाते हैं. इस व्याधि में उपवास को परम औषध माना गया है. Tonsil के रोगी को गर्म पानी का सेवन करना चाहिए. सोंठ मिला गर्म पानी लेने से तुरंत लाभ मिलता है. दशांग लेप एवं आममोदादि चूर्ण का लेप समान भाग मिला कर गले पर लगाने से राहत मिलती है. इसके साथ अनेकों आयुर्वेदिक औषधियां इस बीमारी में लाभप्रद हैं. जैसे लक्ष्मीविलास रस 2-2 गोली शुष्म पानी से लेना चाहिए. श्रृंग रामरस टैब एवं सेपनो टैब 2-2 गोली शुष्म पानी से लेने चाहिए. बच्चों में यह बीमारी बार-बार हो, तो कुमार कल्याण रस 1-1 गोली दो बार शहद के साथ देना चाहिए. श्रृंगभादि चूर्ण एवं लवगांदि चूर्ण 1-1 रती तीन बार मधु से दें, लाभ मिलेगा. घरेलू उपाय में Tonsil सूजन को कम करने में हल्दी का पाउडर अच्छी दवा है. 1-1 चम्मच हल्दी का पाउडर शुष्म पानी से लें. Tonsils  होने पर तुरंत चिकित्सक से मिलना चाहिए.

इसके इलावा आप इसको भी आजमा सकते हैं

Gharelu upchar for Tonsils in Hindi 

Ø कपड़े को तवे पर हल्का गरम करके गला सेकें आपको आराम मिलेगा।
Ø हर रोज़ 15 मिनिट शंख मुद्रा का अभ्यास करने से आपको आराम मिलता है |
Ø रात को सोते समय 1 कप हलके गुनगुने भैंस या गाय के दूध में एक  छोटा चम्मच हल्दी का पाउडर डाल कर पीना भी Tonsil का एक घरेलू उपचार है।
Ø सुबह शाम गले मे उंगली डाल कर गला अच्छी तरह से सफ करें। ऐसा करने से टॉन्सिल्स का गंद साफ़ हो जाता है।
Ø Tonsil के घरेलू उपाय के लिए देसी घी से गले की मालिश करें। इससे Tonsil में जल्द आराम मिलता है।
Ø कब्ज़ के कारण हुए Tonsil के लिए गाजर का रस बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। यह भी Tonsil के घरेलू इलाज में से एक है।
Ø Tonsil के रोगी जंक फ़ूड, चटपटा और तला खाना खाने से परहेज करें। खट्टी चीज़े जेसे की दही, छाछ का सेवन आदि ना करें।
Ø अंजीर को पानी में उबाल कर पेस्ट बना लें। फिर उस पेस्ट को गले पर लगायें। ऐसा करने से Tonsil मे राहत मिलेगी।

ज्यादा जानकारी के लिय किसी नजदीकी डॉक्टर से सलाह ले 

18 नवंबर 2015

Ayurvedic treatment for Blood purification

Ayurvedic treatment for Blood purification


रक्त (Blood) को साफ करने का घरेलु उपचार

Blood Purifier
Blood Purifier


हमारे जिश्म में साफ रक्त (Blood) का होना बहुत जरुरी है, क्‍योंकि यह हमारे अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य की निशानी है। अगर हमारा रक्त (Blood) साफ नहीं होगा तो दिन-रात अनेको बीमारियों से घिरे रहेगें और त्‍वचा पर भी इसका असर दिखना शुरु हो जाएगा। इसलिए आपको अपने रक्त (Blood) को साफ करने के लिए जरुरी कदम उठाने चाहिये। रक्त (Blood) को साफ रखने के लिए आप को ऐसे आहार खाने चाहिये जिससे आपका चेहरा दमकता रहे और आप स्‍वस्‍थ्‍य भी रहें। रक्‍त शुद्ध करने वाले आहार-

Ayurvedic treatment for Blood purification

रक्त (Blood) को साफ करने का घरेलु उपचार

1.नींबू- अगर आप रोज़ सुबह नींबू को गरम पानी में निचोड़ कर पिएगें तो यह आपके रक्त (Blood) को शुद्ध करने का बहुत अच्‍छा काम करेगा। यह घोल न केवल आपके रक्त (Blood) को साफ करेगा बल्कि यह जिश्म के सभी विशैले तत्‍वों को भी निकाल बाहर करेगा। अगर आप एक हफ्ते सुबह नींबू पानी पिएगें तो आप खुद ही इसका असर देख सकते हैं। भूंख तो बढेगी ही इसके साथ साथ वजन भी कम होगा।

2.मिर्च- किसी भी रुप में मिर्च खाने से रक्त (Blood) की साफाई हो जाती है। चाहे वो काली मिर्च हो या फिर हरी मिर्च ही क्‍यों न हो। मिर्च में एंटीऑक्‍सीडेंट पाया जाता है जो जिश्म में एक दरबान की तरह काम करता है और विषैले तत्‍वों को अंदर आने से रोकता है। हां अगर आपको मिर्च खाने से मना किया गया है तो आपको यह नहीं खानी चाहिये।

3.हरी सब्‍जियां- यह सब्‍जियां हमारे जिश्म से विषैले तत्‍वों को निकालती हैं क्‍योंकि इसमें क्‍लोरोफिल पाया जाता है। अब आप सोंच रहे होगें कि भला क्‍लोरोफिल से कैसे यह संभव है। पर यह एक ऐन्टीडिप्रेसन्ट का भी काम करता है इसलिए आपको अपने सलाद में इसे शामिल करना बहुत जरुरी है।

4.गाजर और चुकंदर- इसके अंदर कैरोटीन पाया जाता है जो न केवल आंखों ओर त्‍वचा के लिए अच्‍छा होता है। बल्कि कैरोटीन जिश्म के अंदर विषैले तत्‍वों को साफ कर के रक्त (Blood) को स्‍वच्‍छ भी बनाता है। गाजर हमारे पाचन तंत्र को भी सही रखता है।
5.अदरक- यह एक सूपर फूड माना जाता है। इसके कई फायदे हैं पर जो अनोखा फायदा है वह यह कि इससे रक्त (Blood) स्‍वच्‍छ होता है। अगर आप इसको कच्‍छा खाएगें तो यह साफ रक्त (Blood) बनाएगा और रक्त (Blood) में नई कोशिकाओं को जन्‍म देगा।
ज्यादा जानकारी के लिए किसी विशेषज्ञ डोक्टर से संपर्क करें 



17 नवंबर 2015

माइग्रेन/अधकपारी का दर्द Migraine ka Rambaan upchar


माइग्रेन/अधकपारी का दर्द

Migraine ka Rambaan upchar

Migraine
Migraine
आज के समय में आदमी की तनाव से भरी दिनचर्या में माइग्रेन एक बहुत बड़ी समस्या बन चुकी हैं। माइग्रेन बहुत ही सामान्य सा लगने वाला लेकिन अलग तरह का सिर का दर्द है। माइग्रेन से ग्रस्त सभी लोगों को कई वर्षों तक सिरदर्द के नियमित दौरे पड़ते रहते हैं। यह दर्द सामान्य‍ से तीव्र तक हो सकता है।  

माइग्रेन के लक्षण : सिर में तेज दर्द, अधिक उल्टियां आना और आंखों से धुंधला दिखाई देना|
माइग्रेन होने के निम्नलिखित कारण हैं

Ø  कैफीन का जरुरत से ज्यादा उपभोग करना या नियमित उपभोग में कुछ कटौती कर  देना ।
Ø  तनाव का होना , नींद का पूरा न होना। 
Ø  हार्मोन के स्तर में परिवर्तन हो जाना ।
Ø  यात्रा या मौसम में अधिक परिवर्तन।
Ø  दर्द-निवारक दवाओं का अधिक सेवन|

माइग्रेन के अन्य भी कई कारण हो सकते हैं: तनाव, अपच का होना , उच्च रक्तचाप , खानपान नियमित न होना , जरुरत से ज्यादा शारीरिक श्रम। यह कभी-कभी अनुवांशिक कारणों से भी हो जाता है। 

माइग्रेन से आपके बचाव के घरेलू नुस्खे:


Ø  कपूर के घी में मिलकर सिर पर हलके हाथों से मालिश करें|
Ø  निम्बू के छिलके को पीसकर उसके लेप को माथे पर लगाने से माइग्रेन का दर्द ठीक होता हैं|
Ø  दर्द होने वाले स्थान पर सिर में हल्की-हलकी मालिश करें।
Ø  एक गर्म पानी से भीगे तोलिये से दर्द वाले स्थान पर सिकाई करें|  इसके अलावा ठंडी सिकाई भी   आप बर्फ के टुकड़े से कर सकते हैं|
Ø  नियमित आहार व नियमित दिनचर्या का अनुसरण करें।
Ø  दिन में कम से कम 15  गिलास पानी थोड़े थोड़े अन्तराल के बाद पीते रहें|
Ø  आप  योगासन, एक्यूपंक्चर या फिर अरोमा की थेरेपी जैसी चिकित्‍सा पद्धति का भी इस्तेमाल कर सकते हैं|

अब तक माइग्रेन की बीमारी के किसी भी वैज्ञानिक कारणों का पता नहीं चल पाया है और सभी तरह के माइग्रेन सिरदर्द का उपचार करना भी मुश्किल हैं। लेकिन सिरदर्द के दौरे से पहले होने वाले कारकों को ठीक से पहचान कर माइग्रेन के दौरों की गति को बहुत कम किया जा सकता है। माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति को कभी भी माइग्रेन का दर्द हो सकता है इसलिए अच्छा होगा आप दर्द से बचने के लिए अपनी स्थितियों को समझें और नियमित  दिनचर्या का पालन करें।

इसके  इलावा कुछ और कारगर नुस्खे भी है


Gharelu upchar: Migraine ka Rambaan upchar


सभी जानते है की माइग्रेन में होने वाला सिर का दर्द कितना तकलीफ दायक होता हैं| यह दर्द अचानक ही शुरू होता हिं और अपने आप ही कुछ समय बाद ठीक भी हो जाता हैं|
हाथो के स्पर्श से मिलने वाला आराम और प्यार किसी भी दावा से ज्यादा असर करता हैं| इस दर्द में अगर सिर, गर्दन और कंधो की मालिश की जाये तो यह इस दर्द से रहत दिलाने में मददगार साबित हो सकता हैं


10 नवंबर 2015

आयुर्वेदिक खान-पान टिप्‍स से पाचन क्रिया (Digestive System) को करें दुरुस्‍त

आयुर्वेदिक खान-पान  टिप्‍स से पाचन क्रिया (Digestive System) को करें दुरुस्‍त 

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Digestive System
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आपके अच्छा स्वास्थ्य अच्छे पाचन तंत्र (Digestive System) की देन होता है। हम जो कुछ भी खाते हैं, उसे सही ठीक से जिश्म  में पहुंचाने का कार्य  हमारा पाचन तंत्र (Digestive System) ही करता है। पाचन तंत्र (Digestive System) खाने को एनर्जी के रूप में बदल कर जिश्म  को पोषण और ताकत प्रदान करता है और हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति को मजबूत बनाता है। पाचन तंत्र (Digestive System) में गड़बड़ी होने से हम जो कुछ भी खाते हैं, उसे सही से पचा नहीं पाते। इसके वजह से  जिश्म  को आवश्यक विटामिन और मिनरल नहीं मिल पाते और जिश्म में हानिकारक तत्व लगातार बढ़ने लगते हैं। और हमारा इम्यून सिस्टम भी धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है इसके वजह से कई बीमारी हमपे हमला कर देता है । कभी कभी  हम स्‍वाद-स्‍वाद में बहुत ज्‍यादा खा लेते हैं। उस समय तो हमें पता ही नहीं चलता, लेकिन बाद में पछताना पड़ता है। जब हमारा पेट इस खाने को सही हजम नहीं कर पाता तो हमें अपच, एसिडिटी, कब्ज जैसी पेट से जुड़ी हर समस्याओं से गुजरना पड़ता है।

पाचन तंत्र (Digestive System) को दुरुस्‍त रखें आयुर्वेंद

पाचन तंत्र (Digestive System) अपनी तय की गई समय सीमा के अनुसार चलती है और इस समय सीमा के वजह से  हमें दिन के अलग-अलग पहर में भूख लगती है। कुछ भी खाने के बाद हमारा पचान तंत्र अपना काम करना शुरू करता है तथा जैसे ही उनका काम खत्म होता है वह अगली क्रिया प्रारंभ करने के लिए मस्तिष्क को संकेत करता है। अगर इस प्रक्रिया में बाधा उत्‍पन्‍न हो जाये तो इससे पाचन क्रिया में बाधा उत्‍पन्‍न होने लगती हैं। लेकिन आप घबराइए नहीं क्‍योंकि आयुर्वेदिक चिकित्‍सा से आप अपनी पाचनक्रिया को तीन दिन में फिर असानी से दुरुस्‍त कर सकते हैं। आयुर्वेदिक खान-पान  टिप्‍स हमारे पाचन तंत्र (Digestive System) को सही करके उसे पहले की ही तरह कार्यशील बना देती है।

 पहला दिन

पाचन तंत्र (Digestive System) को बेहतर  करने के लिए आप पहले दिन अपने दिन की शुरुआत नाश्‍ते से करें, और सुबह उठने के थोड़ी देर बाद कम से कम दो गिलास पानी जरूर पिए । और उठने के 1 से 2 घंटे के बाद नाश्‍ता अवश्य कर लें। फिर दोपहर में खाना खायें। लेकिन एक बात का ध्‍यान रहें कि खाने में चटपटी चीजों को बिलकुल शामिल न करें। और रात का खाना सोने से 2 घंटे पहले खा लेना चाहिए। और रात के खाने के लगभग आधे घंटे के बाद 2 गिलास गुनगुना पानी का सेवन करें । पहले दिन आपका सुबह का नाश्‍ता और दोपहर का खाना सामान्‍य ज़रूर होना चाहिए और रात को जरूरत के हिसाब से खायें, यानी रात का खाना ज्यादा भरी नहीं होना चाहिए।

दूसरा दिन

दूसरे दिन पाचनक्रिया को फिर से उसी तरह  करने के लिए आपको इसकी गति को धीमा करना होगा। इसलिए दूसरे दिन आप खाना कम और लिक्विट चीजें ज्‍यादा लेने की कोशिस करें । इसके लिए आप पूरे दिन में 3 से 4 गिलास जूस लें और हल्‍का खाना जैसे दलिया  और खिचड़ी ही लें। पानी और नींबू पानी का जयादा परयोग  करें, क्‍योंकि यह पाचन क्रिया को दुरुस्‍त रखने में काफी मदद करती है। इस दौरान अपना मन शांत रखें और साथ ही हर रोज सुबह-शाम वॉकिंग भी करें।

 तीसरा दिन

आयुर्वेदिक खान-पान  टिप्‍स के आखिरी  दिन में आपको अपनी पाचनक्रिया को सामान्य कार्यशीलता पर वापस लाना  होता है। इसलिए उठने के 1-2 घंटे के बाद नाश्ता कर लें क्‍योंकि उठने के बाद ज्‍यादा देर खाली पेट रहने से भी पाचन क्रिया को नुकसान हो सकता है। और फिर दोपहर का खाना खाएं। दोपहर के खाना खाने के बाद सीधे रात का खाना खाएं। नाश्ते से लेकर दोपहर के खाने तक व दोपहर के खाने से लेकर रात के खाने  के बीच कुछ ना खाएं सिर्फ पानी पी सकते हैं । डिनर को सोने से 2 घंटे पहले खा लें। और ध्‍यान रहें डिनर की मात्रा दोपहर के खाने से थोड़ा कम ज़रूर होनी चाहिए।
इसी तरह  तीन दिन करने से आपकी पाचनक्रिया अपनी सामान्य गति पर पहुंच जाती है। यह क्रिया आपको अपनेआप  भूख का अहसास करायेगी। आयुर्वेद के नियम के अनुसार सुबह उठने के 1 या 2 घंटे के बाद नाश्ता करना, समय पर दोपहर का भोजन खाना व सोने से दो घंटे पहले रात का भोजन खाना। ये सारे आयुर्वेदिक खान-पान  टिप्‍स आपके पाचन को हमेशा दुरुस्‍त रखने में मदद करते हैं। इस खान-पान  टिप्‍स को पाचन क्रिया के खराब होने पर आप जरूर अपना सकते हैं।


मेरे इस पोस्ट को पढने के लिए शुक्रिया

09 नवंबर 2015

भूख बढ़ने का घरेलू उपचार कैसे करें ?

भूख न लगना या कम लगना (Bhookh Na Lagna)

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अरुचि,  इस रोग मे मरीज को भूख बहुत कम लगती है| अगर मरीज जबरदस्ती खाना खा भी ले तो वह अरुचिकर लगता है | रोगी 1 या 2 निवाला से ज्यादा नहीं खा पाता और उसे बिना कुछ खाये -पिये खट्टी कट्टी डकारें आनी  शुरी हो जाती  हैं | इस तरह भूक न लगने अरुचि कहलती  हैं |
आमाशय या पाचनतंत्र में कमी होने के वजह से  भूख लगनी धीरे धिर्रे कम हो जाती है | ऐसे में अगर आप कुछ दिनों तक इस बात पर ध्यान न दिया तो आपको भूख लगनी बिलकुल ही बंद हो जाती है| इसका कारण है अधिक चिंता, गुस्सा , भय और घबराहट के कारण भी यकृत की ख़राबी के वजह से  भी भूख नहीं लगती है |

घरेलु औषधियों द्वारा अरुचि का उपचार

(Bhookh Na Lagna)

१-गेंहू के चोकर में सेंधा नमक और अजवायन को एक साथ मिलाकर रोटी बनाकर खाने से भूख बढती है |
२-एक सेब या सेब के रस को रोजाना सेवन करने से खून साफ़ होता है और भूख भी खूब लगती है |
३-एक गिलास पानी में 2 ग्राम जीरा , कालीमिर्च , पुदीना , हींग और कला नमक डालकर रोज पीने से अरुचि दूर होती है |
४-अजवायन में आपने स्वाद के अनुसार कालानमक मिलाकर गर्म पानी के साथ रोज उपयोग  करने से अरुचि दूर होती है |
५-हर जोज मेथी में छौंकी गई दाल या सब्ज़ी के सेवन से भूख खूब लगती है |

६-नींबू को काटकर और इसमें कला नमक डालकर भोजन से पहले चूसने से कब्ज़ दूर होकर पाचनक्रिया तेज़ हो जाती है जिससे की आपको भूख तेजी से लगने लगती है |

05 नवंबर 2015

गर्भावस्था में महिलाएं कैसे रखे अपना खास ख्याल?


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हर महिला कि यह चाहत होती है कि वह एक तंदरुस्त बच्चे को जन्म दे। इस चाहत को पूर्ण करने के लिए गर्भावस्था (Pregnancy) मे पौष्टिक आहार को खाना बहुत जरुरी है। गर्भस्थ शिशु का सम्पूर्ण विकास भी माता के खान-पान पर निर्भर होता है। गर्भवती महिला को ऐसा पोष्टिक आहार लेना चाहिए जो उसके गर्भस्थ शिशु के पोषण में सहायक हो सके।
सामान्यत: महिला को हर रोज 21 सौ कैलोरी  अपने आहार में लेनी चाहिए। और एक गर्भवती महिला को आहार के माधयम से 3 सौ कैलोरी  अतिरिक्त  लेनी ही चाहिए। इसीलिए एक गर्भवती महिला को 24 सौ कैलोरी अपने भोजन से प्राप्त करनी चाहिए|
गर्भावस्था(Pregnancy) में महिला को आहार में कौन से चीजे लेना चहिए ओर कितनी मात्रा में लेना चाहिए इसकि अधिक जानकारी नीचे दी जा रही हैं|

1) प्रोटीन (Proteins)

गर्भवती महिला को आहार मे प्रतिदिन 50 से 75 ग्राम तक प्रोटीन की मात्रा अपने भोजन में शामिल करनी चाहिए।
गर्भवती महिला के गर्भाशय, स्तनों तथा गर्भ के पूर्ण विकास और पूर्ण वृद्धि के लिये प्रोटीन  एक बहुत ही जरूरी तत्व है।
और गर्भ धारण के अंतिम छ: माह के दौरान तो महिला को एक किलोग्राम प्रोटीन आहार  की आवश्यकता होती है।
जिन भोजन में प्रोटीन की अधिकता पाई गयी हैं वे आहार हैं दूध और दुध से बने सभी खाद्य पदार्थ , मूंगफली, पनीर, चिज़, काजू, बदाम जैसे सूखे मेवे और  दलहन, मांस, मछली तथा अंडे आदि।    


2) कैल्शियम (Calcium)

गर्भवती महिला को आहार मे हर रोज 15 से दो हज़ार मिलीग्राम तक कैल्शियम भी मिलना चाहिए।
गर्भवती महिला के और गर्भस्थ बच्चे की स्वस्थ और शक्तिशाली हड्डियों के लिये कैल्शियम की  आवश्यकता अधिक रहती है।
कैल्शियम से पूर्ण आहार में दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थ , दलहन, मक्खन, चीज, मेथी, बीट, अंजीर, अंगूर, तरबूज, तिल, उड़द, बाजऱा, मांस आदि शामिल है।

3) फोलिक एसिड (Folic Acid)


पहली तीन महीने वाली महिलाओं को प्रतिदिन पांच ग्राम फोलिक एसिड लेंने की जरूरत होती है। दूसरी और अंतिम तीन महीनो में छ: ग्राम तक फोलिक एसिड लेंने की आवश्यकता होती है।
पर्याप्त मात्रा में Folic Acid लेने से जन्मदोष और गर्भपात होने की सम्भावना बहुत कम हो जाती है। इस तत्व के सेवन करने से गर्भवती महिला को उलटी नहीं होती हैं ।
आपको तो फोलिक एसिड  का सेवन शुरुआत में ही करना चाहिए जबसे  आपने  माँ बनने का निश्चय  कर लिया हो।
फोलिक एसिड से  युक्त आहार मे दाल, राजमा, पालक, मटर, मक्का, हरी सरसो, भिंड़ी, सोयाबीन, काबुली चना, स्ट्रॉबेरी, केला, अनानास , संतरा, दलीया, साबुत अनाज का आटा, आटे कि ब्रेड आदि का समावेश होता है।  

4)  पानी (Water)


गर्भवती स्त्री हो या कोई भी इन्सान , पानी हमारे शरीर के लिये बहुत ही महत्वपुर्ण है। गर्भवती महिलाओ को अपने शरीर में पानी कि बढ़ती हुईं आवश्यकताओं को पुरा करने के लिये प्रतिदिन कम से कम 4 लीटर (10 से 12 ग्लास) पानी अवश्य पीना चाहिए। गर्मी के मौसम में 6 लीटर पानी पीना चाहिए। 
इस बात का ध्यान रहे की हमेशा आप साफ़ और सुरक्षीत पानी ही पिएँ | अगर आप बाहर जाते है तो अपना साफ़ पानी हमेशा साथ रखे या अच्छा बोतलबंद पानी का इस्तेमाल करे। 
पानी की हर बूंद आपकी गर्भावस्था(Pregnancy) को स्वस्थ और सुरक्षित बनाने मे सहायक है।

5)  विटामिन (Vitamins)


गर्भावस्था(Pregnancy) के समय Vitamins कि जरुरत बढ़ जाती है।
खान पान ऐसा होना चाहिए कि जो पर्याप्त मात्रा मे calories तथा अधिक  मात्रा में Proteins के साथ Vitamins कि जरुरत कि पूर्ति कर सके।
हरी पत्तेदार ब्जियां, दलहन, दूध आदि से भी Vitamin उपलब्ध हो जाते है।

6) आयोडीन (Iodine)


गर्भवती महिलाओ  के लिये हर रोज  कम से कम 200 माइक्रोग्राम Iodine कि जरूरत  होती है।
Iodine आपके बच्चे के दिमाग के विकास  के लिये आवश्यक है। इस तत्व की कमी से बच्चे मे मानसिक बीमारी , वजन बढ़ना और महिलाओ मे गर्भपात जेसी अन्य समस्या उत्पन्न होती है।  
गर्भवती महिलाओ को अपने डॉक्टर कि सलाह से Thyroid Profile जॉंच कराना चाहिए।

 7) झींक (Zinc)


गर्भवती महिलाओ  को कम से कम  15 से 20 मिलीग्राम Zinc कि जरूरत होती है।
इस तत्व कि कमी से ज्यादा भूख नहि लगतीं, शारीरिक विकास रूक जात्ता है, त्वचा रोग होने के सम्भावना बढ़ जाते है।
पर्याप्त मात्रा में शरीर को Zinc कि पूर्ति करने के लिए ज्यादा हरी पत्तेदार सब्जिया ले सकते है।

8. COCOZHI


इन सभी को पूर्ति करने के लिए हम आपको एक ऐसी दवाई के बारें में बताने  जा रहे जो आपको उपरोक्त सभी जरूरतों को पूरा करता है इस दवाई का नाम का Cocozhi   जो की DXN company कंपनी का ये दवाई बहुत ज्यादा फायदेमंद और ये आसानी से बाज़ार में मिल जाते है